अपनी चंद्र राशि व लक्षणों से जांचें
अपनी राशि चुनें और 3 सामान्य प्रश्नों के उत्तर देकर जानें कि वर्तमान में आप पर शनि साढ़े साती, मांगलिक या पितृ दोष का कितना प्रभाव हो सकता है।
वैदिक दोष विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया
सनातन ज्योतिष में 'दोष' का अर्थ कोई अभिशाप नहीं, अपितु आत्मा के पूर्व संचित कर्मों की ऊर्जा दिशा है। सही मंत्र जप, दान और आचरण शुद्धि से किसी भी दोष के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।
👈 बाईं ओर अपनी राशि चुनकर तुरंत जांचेंपितृ दोष (Pitra Dosha)
पूर्वजों के आशीर्वाद, तर्पण एवं कुल समृद्धि का वैदिक विधानपरिभाषा एवं शास्त्रीय आधार
कुंडली में नवम भाव (धर्म व भाग्य भाव) पर पापी ग्रहों का प्रभाव, सूर्य-राहु युति, चंद्र-केतु युति अथवा पूर्वजों के अंतिम संस्कार/श्राद्ध में त्रुटि होने पर पितृ दोष माना जाता है।
प्रमुख लक्षण एवं पहचान:
- वंश वृद्धि में निरंतर रुकावट या संतान संबंधी गहरी चिंताएं।
- परिवार में बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक गंभीर रोग या कलह।
- बनते हुए कार्यों का ऐन मौके पर रुक जाना व आर्थिक हानि।
- सपनों में पूर्वजों का दुखी, भूखा-प्यासा या संकट में दिखाई देना।
शास्त्रोक्त अचूक निवारण उपाय (Remedies)
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः (नित्य ११ या २१ बार)।
श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें एवं ग्यारहवें अध्याय का नित्य पाठ कर पुण्य पितरों को समर्पित करें।
अमावस्या को ब्राह्मण या जरूरतमंद को खीर, भोजन, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान।
प्रत्येक अमावस्या को पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान अथवा त्रिपिंडी श्राद्ध (गया/हरिद्वार/ब्रह्मकपाल)।