अपनी चंद्र राशि व लक्षणों से जांचें
अपनी राशि चुनें और 3 सामान्य प्रश्नों के उत्तर देकर जानें कि वर्तमान में आप पर शनि साढ़े साती, मांगलिक या पितृ दोष का कितना प्रभाव हो सकता है।
वैदिक दोष विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया
सनातन ज्योतिष में 'दोष' का अर्थ कोई अभिशाप नहीं, अपितु आत्मा के पूर्व संचित कर्मों की ऊर्जा दिशा है। सही मंत्र जप, दान और आचरण शुद्धि से किसी भी दोष के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।
👈 बाईं ओर अपनी राशि चुनकर तुरंत जांचेंशनि साढ़े साती एवं ढैया (Shani Sade Sati)
कर्म फलदाता शनि की शुद्धि वेला एवं आत्म-उन्नति कालपरिभाषा एवं शास्त्रीय आधार
गोचर में जब शनि जन्म कुंडली में जन्म राशि (चंद्रमा की स्थिति) से १२वें भाव, लग्न भाव तथा द्वितीय भाव में भ्रमण करते हैं, तो साढ़े सात वर्ष का समय साढ़े साती कहलाता है। चतुर्थ व अष्टम भाव में भ्रमण को ढैया (ढाई वर्ष) कहते हैं।
शास्त्रोक्त अचूक निवारण उपाय (Remedies)
ॐ शं शनैश्चराय नमः अथवा ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र एवं संकटमोचन हनुमानाष्टक।
छाया दान (कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल डालकर अपना मुख देखकर दान करना), काला छाता, काले जूते या उड़द का दान।
प्रत्येक शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।