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श्री हनुमान जी की 110 फीट ऊंची प्रतिमा – सीतामढ़ी परिसर, भदोही: आस्था का विशाल स्वरूप | 110 Feet Hanuman Statue, Sitamarhi Bhadohi: A Towering Symbol of Devotion

380 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Hanuman आराध्य देव
06:00 AM – 09:00 PM (Daily) दर्शन समय
Evening Aarti: 7:00 PM (Daily) आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Hanuman
दर्शन समय 06:00 AM – 09:00 PM (Daily)
आरती समय Evening Aarti: 7:00 PM (Daily)
स्थान / पता 110 Feet Hanuman Statue, Sitamarhi Complex, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 श्री हनुमान जी की 110 फीट ऊंची प्रतिमा – सीतामढ़ी परिसर, भदोही

भक्ति, शक्ति और विश्वास का अद्वितीय केंद्र (110 Feet Hanuman Statue, Sitamarhi Bhadohi)

भदोही जिले के सीतामढ़ी परिसर में स्थित विशाल हनुमान प्रतिमा – ऊँचाई 110 फीट, दर्शनीय और आध्यात्मिक

🌟 परिचय: विशाल हनुमान प्रतिमा का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) में स्थित सीतामढ़ी परिसर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर स्थापित 110 फीट ऊंची श्री हनुमान जी की प्रतिमा न केवल भदोही बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था का प्रतीक बन चुकी है। यह विशालकाय मूर्ति दूर-दूर से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है और भक्तों को अद्भुत ऊर्जा से भर देती है।

यह प्रतिमा अपनी विशालता, भव्यता और शिल्प कला के लिए जानी जाती है। सीतामढ़ी परिसर पहले से ही माता सीता की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है, और अब यह विशाल हनुमान जी की मूर्ति ने इस स्थान के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा दिया है।

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने और प्रतिमा के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, बल-बुद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

यह विशाल हनुमान प्रतिमा उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) के सीतामढ़ी परिसर में स्थित है। सीतामढ़ी गाँव भदोही शहर से लगभग 12 किमी दूर है और यह स्थान अपनी ऐतिहासिक एवं धार्मिक पृष्ठभूमि के लिए प्रसिद्ध है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही (लगभग 12 किमी), वाराणसी (लगभग 45 किमी), प्रयागराज (लगभग 120 किमी)
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BEO) है, जो कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। वाराणसी जंक्शन (BSB) भी लगभग 45 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: भदोही से सीतामढ़ी के लिए नियमित ऑटो, टैक्सी और सरकारी बसें उपलब्ध हैं। यह स्थान वाराणसी-प्रयागराज मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी (VNS) है, जो लगभग 50 किमी दूर है।
🗺️

सीतामढ़ी, भदोही, उत्तर प्रदेश

भदोही शहर से दूरी: ~12 किमी
वाराणसी से दूरी: ~45 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सीतामढ़ी का नाम ही माता सीता से जुड़ा है। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान माता सीता ने यहाँ कुछ समय बिताया था और यह स्थान उनकी तपोभूमि रहा है। यहाँ एक प्राचीन सीता मंदिर भी है, जहाँ श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं।

हाल ही में (सन् 2020 के आसपास) इस परिसर में 110 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई, जो क्षेत्र की आस्था का नया केंद्र बन गई। इस विशाल मूर्ति का निर्माण स्थानीय लोगों और संस्थाओं के सहयोग से किया गया। कहा जाता है कि जब मूर्ति स्थापित हुई, तब से ही यहाँ भक्तों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

यह प्रतिमा हनुमान जी के बाल स्वरूप में है, जिसमें वे अपने हाथ जोड़े खड़े हैं। यह मुद्रा भक्तों के प्रति उनकी कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक है।

🕊️

"110 फीट ऊँची यह प्रतिमा भक्ति और विश्वास की अटल शिखर है।"

मान्यता: सीतामढ़ी में हनुमान जी के दर्शन माता सीता की कृपा के साथ-साथ संकटमोचक का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यहाँ आने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

🏛️ विशालता, वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 110 फीट ऊँचाई – अपने आप में अद्वितीय

यह प्रतिमा अपनी 110 फीट ऊँचाई के कारण क्षेत्र की सबसे ऊँची हनुमान मूर्तियों में से एक है। इसे दूर से ही देखा जा सकता है और यह सीतामढ़ी परिसर को एक नई पहचान देती है। मूर्ति का निर्माण उच्च गुणवत्ता वाले सीमेंट और संगमरमर से किया गया है, जो इसे मजबूत और आकर्षक बनाता है।

🎨 कलात्मक डिजाइन

हनुमान जी की इस प्रतिमा में बाल स्वरूप में उनके भक्ति-भाव को दर्शाया गया है। मूर्ति पर सुंदर नक्काशी और रंग-रोगन किया गया है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है। रात के समय लाइटिंग से यह प्रतिमा दिव्य रूप से प्रकाशित होती है।

🌳 सीतामढ़ी परिसर और वाटिका

प्रतिमा के चारों ओर विशाल प्रांगण और हरियाली है। यहाँ बैठने की व्यवस्था है, जहाँ भक्त ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। साथ ही यहाँ प्राचीन सीता मंदिर भी स्थित है, जिससे यह स्थल दोहरी धार्मिक महत्ता रखता है।

🧘 हनुमान भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

यह स्थल केवल दर्शन का स्थान नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक साधना का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

हनुमान चालीसा पाठ

प्रतिदिन शाम को हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ और कीर्तन होता है, जिसमें श्रद्धालु शामिल होते हैं।

📖

रामायण एवं हनुमान कथा

समय-समय पर रामायण पाठ और हनुमान जी की लीलाओं पर प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान शिविर

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान सत्र लगाए जाते हैं, जो मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

इन आयोजनों से भक्तों में आध्यात्मिक जागृति आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • संकटमोचन: हनुमान जी को संकटमोचक कहा जाता है। यहाँ सच्चे मन से प्रार्थना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
  • बल-बुद्धि की प्राप्ति: हनुमान चालीसा का पाठ करने से शारीरिक और मानसिक बल की प्राप्ति होती है।
  • ग्रह दोष निवारण: मान्यता है कि यहाँ हनुमान जी की विशाल मूर्ति के दर्शन से शनि और मंगल दोष में राहत मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ की सकारात्मक ऊर्जा मन को शुद्ध करती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
  • मनोकामना सिद्धि: भक्तों की मान्यता है कि 110 फीट प्रतिमा के दर्शन से मनोवांछित फल अवश्य मिलता है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎂

हनुमान जयंती

चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती का भव्य आयोजन होता है। विशेष पूजा, अभिषेक, और भंडारे का आयोजन किया जाता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌸

रामनवमी

चैत्र नवरात्रि के दौरान रामनवमी पर विशेष रामायण पाठ और झाँकियाँ निकाली जाती हैं।

🎨

मंगलवार और शनिवार

प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा, हनुमान चालीसा पाठ और सुंदरकांड का आयोजन होता है।

🪔

दीपावली

दीपावली के दिन मूर्ति को विशेष रूप से सजाया जाता है और दीपदान का आयोजन होता है।

📿

सुंदरकांड पाठ

प्रत्येक माह के पहले शनिवार को सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • प्राचीन सीता मंदिर: सीतामढ़ी परिसर में ही स्थित यह मंदिर माता सीता की तपोस्थली माना जाता है।
  • भदोही शहर: काली मंदिर, बड़ा गणेश मंदिर, और स्थानीय बाजार दर्शनीय हैं।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 45 किमी दूर।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर – लगभग 120 किमी दूर।
  • जौनपुर: शाही किला, अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद – लगभग 70 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: यदि आप वाराणसी की यात्रा कर रहे हैं तो सीतामढ़ी स्थित 110 फीट हनुमान प्रतिमा के दर्शन अवश्य करें। यहाँ से वाराणसी आसानी से पहुँचा जा सकता है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। गर्मियों में दिन में यात्रा से बचना चाहिए।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • हनुमान जयंती (मार्च-अप्रैल): यदि आप उत्सवी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मूर्ति दर्शन सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक होते हैं।
  • मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ होती है, सुबह जल्दी दर्शन करें।
  • परिसर में प्रसाद और पूजा सामग्री उपलब्ध है।
  • शाम के समय लाइटिंग का आनंद लें – प्रतिमा दिव्य रूप से प्रकाशित होती है।
  • फोटोग्राफी की अनुमति है, लेकिन मंदिर प्रशासन से अनुमति लेना उचित है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: यह विशाल हनुमान प्रतिमा कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) के सीतामढ़ी परिसर में स्थित है। भदोही शहर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: प्रतिमा की ऊँचाई कितनी है?

उत्तर: यह प्रतिमा 110 फीट ऊँची है, जो क्षेत्र की सबसे ऊँची हनुमान मूर्तियों में से एक है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मूर्ति दर्शन और परिसर में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। हनुमान जयंती के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: सीतामढ़ी में कुछ धर्मशालाएँ हैं, लेकिन बेहतर आवास के लिए भदोही या वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है।

प्रश्न 6: सीतामढ़ी कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BEO) है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, और भदोही से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा करवाई जा सकती है?

उत्तर: हाँ, मंदिर प्रशासन से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक, या सुंदरकांड पाठ का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 श्री हनुमान 110 फीट प्रतिमा – सीतामढ़ी यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

सीतामढ़ी परिसर की यह 110 फीट ऊँची हनुमान प्रतिमा भक्ति, शक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि हनुमान जी की अपार कृपा से भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करता है।

यहाँ की विशाल मूर्ति, शांत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाले भजन-कीर्तन एवं हनुमान चालीसा पाठ हर किसी को आध्यात्मिक आनंद से भर देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही जिले की इस धरती पर स्थित यह प्रतिमा उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो हनुमान जी की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 जय श्री राम ।। हनुमान चालीसा का पाठ करें, सभी संकट मिटाएँ ।।

🕊️ श्री हनुमान 110 फीट प्रतिमा – सीतामढ़ी परिसर, भदोही
भक्ति, शक्ति और विश्वास का अद्वितीय केंद्र

संकटमोचन बजरंगबली के पावन चालीसा, अष्टक और मंगलवार आराधना विधि के लिए हनुमान साधना कक्ष अवश्य देखें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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