चैत्र घटस्थापना का अटल संकल्प मंत्र | Chaitra Ghatasthapana Ka Atal Sankalp Mantra – नवरात्रि में संकल्प की शक्ति
भावार्थ: भगवान विष्णु को तीन बार नमन। आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को, मैं (अपना गोत्र एवं नाम) समस्त पापों के क्षय, ग्…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: भगवान विष्णु को तीन बार नमन। आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को, मैं (अपना गोत्र एवं नाम) समस्त पापों के क्षय, ग्…
भावार्थ: ॐ, मैं देवी चामुण्डा (दुर्गा के प्रचंड रूप) को प्रणाम करता हूँ, जो सभी शक्तियों – इच्छा (ऐं), ज्ञान (ह्रीं) और क्रिया (क…
भावार्थ: I bow to the divine power of Pratipada, the first lunar day, which embodies new beginnings, creativity, and auspiciousne…
भावार्थ: I bow to Goddess Chamunda, who embodies the supreme creative (Aim), preservative (Hreem), and transformative (Kleem) ene…
भावार्थ: I bow to Ravi, the Sun God, who is the source of light and energy.
भावार्थ: I bow to Bhaskara, the Sun God, who is the source of light and illuminates the entire universe.
भावार्थ: I bow to Aditya, the Sun God, who is the source of light and energy.
भावार्थ: I bow to the Sun God, the divine source of light, energy, wisdom, and life. This mantra is a salutation to Surya, who il…
भावार्थ: हे देवी! आप शरण में आए हुए दीन-दुःखियों की रक्षा करने में तत्पर रहती हैं। हे सबके आधारभूता देवी नारायणी! आपको नमस्कार है…
भावार्थ: जो बाल ग्रहों (बच्चों को प्रभावित करने वाली नकारात्मक शक्तियों) से ग्रसित बच्चों के लिए शांति प्रदान करने वाला है, तथा म…
भावार्थ: ॐ। मेरी कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है, धन-धान्य से संपन्न और पुत्र-संतान से युक्त हो जाता है – इसमें कोई…
भावार्थ: शत्रु (रिपु) नष्ट हो जाते हैं, कल्याण की प्राप्ति होती है, कुल (परिवार/वंश) आनंदित होता है – उस पुरुष (साधक) के, जो मेरे…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।